मंगलवार, 8 सितंबर 2020

प्रसंशा शायरी

 उगता हुआ सूरज दुआ दे आपको,

खिलता हुआ फूल खुशबु दे आपको,
मैं तो कुछ दे नहीं सकता, देने वाला लंबी उम्र दे आपको !

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

शब्द प्रहार



चलते चलते रास्ते में कई मिल जाते हैं ।
 कई साथ चलते हैं तो कई बिछड़ जाते हैं ।।
 अक्सर याद आते हैं उन मिलने वालों की ।
 जो जिंदगी के सफर में हमसे दूर चले जाते हैं।।

चलते चलते रास्ते में कई मिल जाते हैं ।
 कई साथ चलते हैं तो कई बिछड़ जाते हैं ।।
 अक्सर याद आते हैं उन मिलने वालों की ।
 जो जिंदगी के सफर में हमसे दूर चले जाते हैं।।



बाजारों में बोली इज्जत की लगती है ।
 जज्बा की कोई कद्र नहीं हर अरमान की जान निकलती है ।।
 खरीदने वाला हो कोई ।
 दुनिया में हर चीज बिकती है।।



आवाज जुबान से नहीं आती ।
 सांस धड़कनों में नहीं जाती ।।
 फूल खिलते हैं बहारों में ।
 रेगिस्तान को कली नहीं भाती ।।




भीगी भीगी हैं बोझील रातें ।
 गर्म गर्म है महकती सांसे ।।
 यकीन न आया उनको देखकर ।
 दिल से निकलती हैं आहैं ।।



विरह की आग में जलता दिल ।
 मिलने के लिए तड़पता दिल ।।
 एक फूल भी देना गवारा न हुआ उसको ।
 जिसके लिए गुलिस्तान बना दिल ।।



जमाने के खत्रों को सर पर बांध लिया ।
 महकती हुई हवाओं को साथ ही बना लिया ।।
 जिंदगी में कोई न रहा साथ अपने ।
 सफर को ही हमसफर बना लिया ।।



भटकते हुए दिल को करार आ गया ।
 दुनिया को छोड़ कर मेरे पास मेरा प्यार आ गया ।।
 करते करते मौत का इंतजार ।
 हमें जिंदगी पर ऐतबार आ गया ।।



आसमान के तारे जमीन पर आ जाएंगे ।
 या बहार के फूल खिल जाएंगे ।।
 कैसा होगा वो शमा ।
 जब बांहों में महबूबा आ जाएंगे ।।



न किया हमने किसी से प्यार कभी ।
 न किया हमने किसी का दिल बेकरार कभी ।।
 तन्हा रहे उम्र भर यूं ही ।
 न किया हमने किसी पर ऐतबार कभी ।।



सुबह होती है सूरज निकलने से ।
 रात हुई तारे बिखरने से ।।
 रोशन हुई जिंदगी अपनी ।
 आशियाने में आपके आने से ।।



कदम बढ़े तो उठे तूफान ।
 गर्ज से जिनके फटे आसमान ।।
 डोलती हैं पृथ्वी चलने से जिसके ।
 वह भारतीय फौजी है महान ।।



न था गम बताने के लिए ।
 न थी खुशी मुस्कुराने के लिए ।।
 मैं रहा अकेले जिंदगी भर ।
 कोई न मिला साथ निभाने के लिए ।।



रोज गम के साथ जिया करता हूं ।
 रोज खुशी के साथ मरा करता हूं ।।
 तोड़ा था दिल किसी का कभी मैंने ।
 आज उसी को याद किया करता हूं ।।



लगे प्यास तो दरिया मांगा नहीं जाता ।
 किसी के जज्बात को दबाया नहीं जाता ।।
 कांटे होते हैं हिफाजत के लिए ।
 फूलों को कांटों पर सजाया नहीं जाता ।।


आज दुनिया में हर चीज का दाम लगाया जाता है ।
 जिस्म क्या चीज है यहां दिल भी खरीदा जाता है ।।
 इंसानियत खो गई जाने कहां ।
 अब तो मान और इमान भी खुलेआम बेचा जाता है ।।



हर डगर हर गली में तुम्हारे पास आएंगे ।
 ख्वाबों खयालों में आपके समा जाएंगे ।।
 करोगे हमें भुलाने की जितनी कोशिश ।
 हम उतना याद तुम्हें आएंगे ।।



लोग कहते हैं शराब पीना ठीक नहीं ।
 यूं घुट घुट कर जीना ठीक नहीं ।।
 जो होना सके अपने कभी ।
 उनके लिए अश्क बहाना ठीक नहीं ।।


कैसे भूल जाएं उन्हें जो पराये हुए ।
 अपने दिल से रहे हमें मिटाए हुए ।।
 जो जख्म दिए थे उन्होंने ।
 रखे हैं वह मेरे दिल में पाले हुए ।।


इन हसीनाओं के ख्वाबों में मत रहना ।
 इन बहारों के सायों में मत रहना ।।
 चार दिन में ही छोड़ देंगे साथ ।
 एक ही किसी में दिल लगाये मत रहना ।।



हम मिलते हैं खुशी के लिए ।
 लोग बिछड़ते हैं एक होने के लिए ।।
 प्यार में भी काश ऐसा होता ।
 दिल टूटते मिलने के लिए ।।



फूल देना मोहब्बत नहीं होती ।
 हर मुस्कुराहट कातिल नहीं होती ।।
 यूं तो रास्तों में मिलते हैं बहुत ।
 हर किसी के दिल में चाहत नहीं होती ।।



 गलतफहमी यों का कभी करार न हुआ ।
 हम मिलते रहे मगर इकरार न हुआ ।।
 जिंदगी ले गई हमें उस मुकाम पर ।
 जहां उन्हें हम पर ऐतबार न हुआ ।।



 गुलाब मशहूर है चाहत के लिए ।
 चांद मशहूर है राहत के लिए ।।
 दुनिया के खूबसूरत चेहरों में ।
 आपका चेहरा मशहूर है मुस्कुराहट के लिए ।।



 लड़के जब लड़कियों को देखते हैं ।
 जमकर उसकी तारीफ करते हैं ।।
 दिल को हाथों में रखकर ।
 लड़की से प्यार की फरियाद करते हैं ।।



हमसे भी किसी ने अपना हाल पूछ लिया था ।
 सीने पर मेरे हाथ रख कर अपना हाले दिल कह दिया था ।।
 समझ न सका उसके पैगामें इश्क को ।
 चाहत को भरी महफिल में मैंने रुसवा किया था ।।



 आजकल के लड़के लड़कियां प्यार को फैशन समझते हैं ।
 लड़कियां लड़कों को ट्रेन और लड़के लड़कियों को स्टेशन समझते हैं ।।
 कहीं 5 मिनट रुकते हैं कहीं आधा घंटा रुकते हैं ।
 इसी को यह आज का कांस्टिट्यूशन समझते हैं ।।



 हम जिन्हें हर वक्त याद करते हैं ।
 वह किसी और से मिलने की फरियाद करते हैं ।।
 रुसवा किया मोहब्बत को मेरी ।
 फिर भी हम उन्हीं से प्यार करते हैं ।।



 तूफान जब उठता है समंदर को हिला देता है ।
 राह में आने वाली हर चीज को बहा देता है ।।
 इश्क को रोकना मुमकिन नहीं ।
 वो क्या जाने इश्क जमाने को झुका देता है ।।



 दूर रहने वाले अक्सर अपने के लिए तड़पते हैं ।
 उनसे मिलने की आस हमेशा दिल में रखते हैं ।।
 चार दिन में ही हो जाता है यह साहस ।
 पास रहने वाले ही गैर अजनबी लगने लगते हैं ।।




दूरियां चाहत को बढ़ा देती हैं ।
 सच्चे प्यार को बता देती हैं ।।
 दुनिया के अस्तित्व को ।
 हमारे सामने ला देती हैं ।।



 जिसने किया प्यार गम उसको मिला है ।
 सच्चे प्यार का यही मिलता सिला है ।।
 प्यार की दुनिया में कीमत नहीं होती ।
 प्यार करने वालों को न प्यार मिला है ।।



 आप हमारे बिना कहीं रह नहीं पाएंगे ।
 आप जहां जाएंगे वही हम याद आएंगे ।।
 हर गली हर चौराहे पर नजर उठाकर ढूंढना ।
 कहीं न कहीं हम मिल ही जाएंगे ।।




 किसी को चाहा हमने अपना मान कर ।
 पूजा की उसकी अपना खुदा जानकर ।।
 सूरत भी झूठी मूरत भी झूठी ।
 जाना उसे  पहचान कर ।।



 तड़पते हुए दिल को आंसू भी पिला दिया ।
 एक पल प्यार के खातिर अपना सब कुछ गवा दिया ।।
 कुछ न रहा जब मेरे पास ।
 आपने मेरा घर ही जला दिया ।।



 बहती हुई राहों में चलता गया ।
 सफर जिंदगानी का गुजरता गया ।।
 बढ़ती गई गर्मी इस कदर ।
 लहू में मेरे उबाल आता गया ।।



जब  गम होता है सीने में ।
 तभी मजा आता है जीने में ।
 हर चीज लगती है पराई ।
 मोहब्बत के धोखे में ।।



 तन्हाईयों में हम रोते रहते हैं ।
 अपनों को हम याद करते रहते हैं ।।
 जिंदगी हो जाती है भार ।
 जिसे हम ढोया किया करते हैं ।।




 शायरी में दिल का हाल लिख दिया जाता है ।
 जो कहा न जाए खुले शब्दों से बयां किया जाता है ।।
 शायर का अपना एहसास शायरी से ।
 चाहने वालों तक पहुंचा दिया जाता है ।।




 कलिया महकती है बागों में ।
 लड़कियां बहती हैं राहों में ।।
 चलते चलते प्यार हो जाता है ।
 पता नहीं चलता बातों ही बातों में ।।



 भीगी जुल्फें होठों गुलाबी ।
 गोरे गालों पर नैन शराबी ।।
 बैठ जाए दिल थाम के अपना ।
 जिस पर तुमने नजर डाली ।।




 जलती हुई शमा परवाना ढूंढती है ।
 मिट जाए जो उस पर वह दीवाना ढूंढती है ।।
 हो कोई पास अपने चाहे ।
 फिर भी निगाहें किसी और को ढूंढती ।।


 दोस्ती का मेरी कैसा सिला दिया ।
 मेरे विश्वास को तुमने दगा दिया ।।
 तुम्हें कहा प्यार बढ़ाने के लिए ।
 तुमने इसी बहाने मेरा प्यार ही चुरा लिया ।।



 सीने में पाली थी चाहत मैंने ।
 दीवानों सी की हालत मैंने ।।
 जान देकर अपनी चुकाई है ।
 प्यार की कीमत मैंने ।।



 चांद ऊपर आसमान में जलता है ।
 दिल किसी के प्यार में तरसता है ।।
 खुश लगती हैं जिंदगी अपनी ।
 दर्द का किसी को पता कहां चलता है ।।


बाग से अपने लिए एक फूल चुन लिया करते हैं ।
 गुलाब न सही कांटों को छू लिया करते हैं ।।
 जब याद आती है अपने साथ कि हमें ।
 खूबसूरत चेहरों को देख लिया करते हैं ।।



 कुछ हमें अकेला छोड़  जाते हैं ।
 कुछ हमारा साथ निभाते हैं ।।
 परेशानियों को गलत न समझो ।
 बुरे वक्त में ही लोग पहचाने जाते हैं ।।



 जिंदगी से खफा हूं अपनों से जुदा हूं ।
 चलते हुए सफर में जैसे थमा हूं ।।
 उम्मीद नहीं हम सफर मिलने की ।
 जिसकी तलाश में उम्र भर भटकता हूं ।।



 हम याद उन्हें करते हैं सुबह शाम ।
 दिल ढूंढता है उन्हें हर गली मुकाम ।।
 हमको मालूम है आदत उनकी ।
 दिल लगाकर तोड़ना है उनका काम ।।



 वह याद हमें करते हैं हम याद उन्हें करते हैं ।
वो मिलने को तरसते हैं हम मिलने को तड़पते हैं ।।
 दिल के यह बात होठों पर कैसे आए ।
 वह थोड़े शरमाते हैं हम भी घबराते हैं ।।



 सांसो ने सांसो से कुछ बात की ।
 पहली मुलाकात फिर याद की ।।
 जुबा तो कुछ कह न सके ।
 जज़्बातों ने मिलने की फरियाद की ।।



 जिंदगी की शाख से एक फूल लिए बैठे हैं ।
 यह न समझना किसी से दिल लगाए बैठे हैं ।
 दिल दे भी केसे किसी को ।
 हम खुदा अपना दिल गवाये बैठे हैं ।।



 लड़की जब चलती है टांगों को मटकाती है ।
 कम से कम कपड़े पहनकर जब आती है ।।
 देखकर लड़कों की हंसी उड़ जाती है ।
 रब खैर करे जब कमर को झटकाती है।।


अब जिंदगी में कुछ बदलने वाला है ।
 संभाला हुआ दिल खोने वाला है ।।
 समझ में न आया जिंदगी का फसाना ।
 जो पहले था बेगाना अब अपना होने वाला है ।।



 एक पल के लिए भी उनसे दोस्ती न हुई ।
 उम्र भर मिलते रहे आशिकी न हुई ।।
  दोष क्या दू उनकी आंखों को ।
 दिल तो जलता ही रहा पर रोशनी न हुई ।।



 आंखों से आंसू बहाए नहीं जाते ।
 छुपे हुए गम बताए नहीं जाते ।।
पूछ  भी ले अगर हाल कोई ।
 हर जख्म दिल के दिखाए नहीं जाते ।।



 याद को उसकी भुला न सका ।
 साय से पीछा छुड़ा न सका ।।
 सोने से मैं डरता रहा ।
 सपनों से उसे मिटा न सका ।।



 सीने में दबे अरमानों को बता न सका ।
 चाहत को उसकी छुपा न सका ।।
 बह गई आंसू बनकर मोहब्बत ।
 आंखों में अपनी उनका प्यार छुपा न सका ।।



 पास होकर भी दूर बहुत हो ।
 प्यार पाकर बेवफाई के करीब बहुत हो ।।
 समझ न आये आशकी  हमें । 
दर्द के करीब मर्हम से दूर बहुत हो ।।



 आने वालों को दोस्त बनानी है दुनिया ।
 जाने वालों को भुलाती है दुनिया ।।
 कैसे याद आयेगी हमारी तुम्हें ।
 अजनबी बन जाती है दुनिया ।।




धड़कता है सीना तड़पती है सांसे ।
 मचलता है दिल रोती हैं आंखें ।।
 पिघलता है दामन भटकती है बाहें ।
 निखरता है हुश्न वहकती हैं राहें ।।



 कोई कहे प्यार इसे ।
 कोई कहे पागल इसे ।।
 समझ न आया ।
 यह दिल का रोग मुझे ।।



 उम्र भर जीता रहा दोस्ती के लिए ।
 पीता रहा एक पल की खुशी के लिए ।।
 पूरा हुआ न फसाना जिंदगी का कोई ।
 डूब गया शराब में जीवन की मुक्ति के लिए ।।






रविवार, 5 जनवरी 2020

दर्द और गम

आसमान में सितारे होते हैं चांदनी बढ़ाने के लिए ।
 सागर में उठते हैं तूफान लहरों को बढ़ाने के लिए ।।
 इन आंखों को इल्जाम न देना ।
 आंखें होती हैं दिल में प्यार जगाने के लिए ।।


वीरान घरों में सराय बन जाएं ।
 खुदा करे हम तारे बन जाए ।।
 उन्हें देखने मैं तकलीफ न हो ।
 जहां से भी वह देखें उन्हें हम नजर आए ।।



न मिलने की खुशी होती है न होता है बिछड़ने का गम ।
 जिंदगी भी है तनहा अपनी और दुनिया में अकेले हैं हम ।।
 किसको बताएं दिल का अपने हाल ।
 दुनिया को खरीद कर भी भिखारी लगते हैं हम ।।


हर शाम किसी पर ऐंतबार होता है ।
 हर रात दिल बेकरार होता है ।।
 ओ अकेले छोड़कर जाने वाले ।
 आज भी इन रास्तों पर तेरा इंतजार होता है ।।



आंखों में है प्यार मेरा कैसे छुपा लोगे ।
 रखोगे दिल में या दुनिया को बता दोगे ।।


प्यार की तूफान से किश्ती बचाइए ।
 मोहब्बत के दरिया में खुद को न फसाए ।।
 गिरते चमकते तारों की जिंदगी नहीं होती ।
 अपने आप को इस कदर टूटने से बचाइए ।।


पहाड़ी फूलों में खुशबू नहीं होती ।
 अमास के चांद में चांदनी नहीं होती ।।
 सफर में मिलते हैं साथ बहुत ।
 यू भटकने वालों में वफा नहीं होती ।।


बहती है नदी प्यास बुझाने के लिए ।
 चलती है हवा पतंग उड़ाने के लिए ।
 लड़की करती है फैशन ।
 लड़कों को पटाने के लिए ।।


जाने कौन से रास्ते पर चल रहे हैं लोग ।
 कल की किसी को खबर ही नहीं आज को जिए जा रहे हैं 
 लोग ।।
 किसी को किसी की फिक्र ही नहीं जाने कौन सी दुनिया में जिए जा रहे हैं लोग ।।


तू एक नजर जिस पर डालें । जी उठेंं मरने वाले ।।
 तेरे हुस्न की क्या बात कहें । टपकें होठों से रस के प्याले ।।



वो आएंगे तो शहनाइयां बजेंगी ।
 बागों की कलियां खिल जाएंगी।।
 जाने कितने जल जाएंगे ।
 जब वो  आंखों से बिजलियां गिरायेंगी ।।


बहकते हुए हुस्न ही दीवानों को वहकाते हैं ।
 इश्क की गलियों में आशिक चले आते हैं ।।
 इसमें आश्चर्य की क्या बात है ।
 महकते हुए फूलों पर ही भंवरे मंडराते हैं।।


सोचता हूं वह मेरे पास आ जाते ।
 मेरे होठों पर उनके होंठ लग जाते हैं ।।
 शराब की जरूरत ही न पड़ती ।
 वह हमें होठों के नशे से ही बहका जाते हैं ।।


 शायरी से दिल का हाल बयां किया करते हैं ।
 हर गम को खुशी से पीलिया करते हैं ।।
 जब तड़पता है दिल आपके लिए ।
 तब तुम्हारी तस्वीर देख लिया करते हैं ।।



एहसान जो तुमने मुझ पर किया जिंदगी भर न भूल पाऊंगा ।
 जिंदगी के हर कदम पर पास रहूंगा ही, मर कर भी साथ निभाऊंगा ।।



मांग तेरी तारों की झिलमिल से सजाऊंगा ।
 जीवन में तुम्हारे हर खुशी ले आऊंगा ।।
 ज़िन्दगी भर तो रहूंगा पास आपके ।
 मर कर भी साथ निभाऊंगा ।।



सोचता हूं मैं तारा होता ।
 हर वक्त तुम्हें देखता होता ।।
 जब भी खलता आंखें अपनी मैं ।
 उस समय सामने तुम्हारा मुखड़ा होता ।।



कोई अब भी मुझको बुला रहा है ।
 मेरी याद में खुद को तड़पा रहा है ।।
 सुकून मिलता था जलाकर दिल जिसको ।
 आज वही विरह में जला जा रहा है ।।



बीती हुई रातों को कोई याद न दिला दे ।
 पीता हूं कहीं कोई होश में न ला दे ।।
 टूटे हुए दिल को उम्मीद ही कहां जीने की ।
 डरता हूं मरते हुए को भी कहीं कोई जहर न पिला दे ।।



जिंदगी में हर किसी का कोई खास होता है ।
 भले ही वह किसी और के पास होता है ।।
 दुनिया कहे कुछ भी हमको ।
 जिसके दिल में है प्यार उसी को ही एहसास होता है ।।




सब याद है मुझको

वो गिरती हुई बूंदें , वो बारिश का पानी ।
बो भीगे बदन की प्रेम कहानी ।।
 सब याद है मुझको, वो पनघट का पानी ।
 सुराही से लिपटी उनकी जवानी ।।
 राजा कि जैसे थी वो रानी ।
 मस्त बहारों की मोज तूफानी ।।

 सब याद है मुझको, वो झरनों की रवानी ।
 वो कल कल करता पहाड़ों का पानी ।।
 तारों में झिलमिल रात सुहानी ।

 सब याद है मुझको वो बात पुरानी ।
 आंखों से उसके जो गिरता था पानी ।।
 विरह की आग में जलती जवानी ।
 लबों से लेकिन कह न पाती ।।
 जमाने ने क्या मन में है ठानी ।
 दिल किसी का टूटा हुई किसको हानि ।।

सब याद है मुझको, वो बात बेगानी ।
 कहते थी दुनिया पर मैंने न मानी ।।
 अब याद आती है वह सूरत पुरानी ।
 भूला में कैसे बचपन की कहानी ।।

 सब याद है मुझको, जो कहते थी नानी ।
 जिंदगी है वैसी जिसने जो जानी ।।
 तुमको लगे क्यों बात पुरानी ।
 मेरे दिल ने तुमको है बतानी ।।
 सुनोंगे दिल से, जो मेरी कहानी ।
 लगेगी तुमको जानी पहचानी ।।




दिल ने फिर याद किया उसको भूल जाने पर ।
 जान ही निकल जाती है उसकी याद आने पर ।।
 एतबार हम पर फिर भी न हुआ ।
 जीते हैं बताएं कैसे हम मर जाने पर ।।


जिससे था प्यार उससे कहना पाया कभी ।
 दिल की गहराइयों में प्यार बहा न पाया कभी ।।
 गम नहीं उसके चले जाने से ।
 अफसोस है मुलाकात उससे करना पाया कभी ।।


कल किसी ने मुझसे सवाल पूछा था ।
 कैसे हो मेरा मिजाज पूछा था ।।
 यकीन न हुआ सुनकर भी मुझको ।
 बहुत दिनों के बाद किसी ने हाल पूछा था ।।



अनजान मुसाफिरों को मंजिल का पता नहीं होता ।
 गाड़ी चलती जाती है रुकने का मालूम नहीं होता ।।
 जिंदगी में रह जाते हैं अकेले अक्सर ।
 क्योंकि कौन कहां साथ छोड़ दे मालूम नहीं होता ।।


अब नजर प्यार की उम्मीद लगाए बैठे हैं ।
 रास्ते में किसी के आंखें बिछाए बैठे हैं ।।
 दिल भी तोड़ दिया उस जालिम ने ।
 फिर भी प्यार की आस लगाए बैठे हैं ।।



हर रात मेरे ख्वाबों में आते रहते हैं ।
 मेरी बेचैनियों को बढ़ाते रहते हैं ।।
 तरस नहीं आता देखकर मेरा हाल ।
 अपनी दिलकश अदाओं से जलाते रहते हैं ।।


दिल तुझे दिया प्यार आने पर ।
 जान तुझे दी ऐतबार आने पर ।।
 ताबूत में भी किया इंतजार उसका ।
 जान चले जाने पर ।।



वफा नहीं थी दामन में तो क्या हुआ बेवफाई ही बता देते ।
 बाग में फूल नहीं थे तो क्या हुआ राह में कांटे ही बिछा देते ।।
 कांटों पर भी चले जाते प्यार करने वाले ।
 मगर दिल में प्यार की आस ही लगा देते ।।


हमने उनसे सिर्फ प्यार किया ।
 चाहत को कभी न दागदार किया ।।
 जिंदगी भर साथ चलने वाले ।
 तूने दो कदम भी मेरा इंतजार न किया ।।



दिन उगता है बाहर छा जाती है ।
 दिल में आपकी चाहत बड़ा जाती है ।।
 जब नजर आ जाते हो तुम ।
 तो जान में जान आ जाती है ।।



ठंडी-ठंडी बारिश की बूंद जब बदन पर पड़े ।
 बहती हुई फिजा जब कान में कुछ कहें ।।
 मन में समा जाती है ताजगी ।
 जब यह आंख किसी खास पर पड़े ।।



मच्छर के प्यार ने दीवाना बना दिया ।
 खटमल के इंतजार में रातों को जगा दिया ।।
 परेशान हूं चारपाई को बर्बाद देखकर ।
 कमबखत ने चैन से सोना भुला दिया ।।



किसी के प्यार में मैं भी रोया था ।
 किसी के इंतजार में मैं भी खोया था ।
 जब वह चली गई छोड़कर ।
 तभी मैं चैन से सोया था ।।



जुल्फ उड़े तो शाम हो जाए ।
आंख झुके तो रात हो जाए ।।
 और क्या कहें उनके बारे में ।
 हवा छूए तो बाहर हो जाए ।।



 प्यार व्यार वफा इकरार ।
 हम भी बहुत किया करते थे यार ।।
 जब इश्क का पर्दा उठा ।
 वही अपना न था जिसके लिए था दिल बेकरार ।।



चलते चलते कई मिल जाए अगर ।
 अपना समझना जूदा जान कर ।।
 बेशक लगाना न सीने से अपने ।
 मगर करना बात मुस्कुरा कर ।।


हो जब तू अकेला कहीं राह में ।
 हो न जब कोई तेरे साथ में ।।
 तब याद करना हमें ।
 हर बढ़ते हुए कदम के साथ में ।।


जिससे था प्यार उससे कह न पाया कभी ।
 दिल की गहराइयों से प्यार बहा  न पाया कभी ।।
 गम नहीं उसके चले जाने का ।
 अफसोस है सलाम भी उसे कर न पाया कभी ।।



कल किसी ने मुझसे सवाल पूछा था ।
 कैसे हो मेरा मिजाज पूछा था ।।
 यकीन न हुआ सुनकर भी मुझको ।
 बहुत दिनों के बाद किसी ने अपना हाल पूछा था ।।




न पलकों पर बैठेंगे तुम्हें ।
 न आंखों में सजाएंगे तुम्हें ।।
 जो दिल याद करता है दिन रात ।
 उसके अंदर बसाएंगे तुम्हें ।।



अच्छा हुआ संभल गय वरना गिर गए होते ।
 लगी थी ऐसी ठोकर रास्ते में बिखर गए होते ।।



जब देखता हूं आंखें तुम्हारी जीने की इच्छा बढ़ जाती है ।
 दिल की धड़कन के साथ आंखों की चमक बढ़ जाती है ।।
 विश्वास न हुआ खुद पर मुझको ।
 मुस्कुराहट को याद कर लबों पर शायरी बन जाती है ।।





याद है मुझे वो रात

याद है मुझे वो रात ।
 जब थी पहली मुलाकात
 धड़कन बढ़ रही थी।
 बेकाबू हो रहे थे जज्बात ।।
 जब सामने थी वह ।
 नई नवेली थी वह ।।
 गहनों में सजी थी वो ।
 मेहंदी से रंगी थी वो ।।
  जब लेकर आई थी बारात ।
 याद है मुझे वो रात ।।

 ख्वावों की परिधि वह ।
 संगमरमर से बनी थी वह ।।
 महकती हुई कली थी वह ।
 सितारों से सजी थी वह ।।
 बिखरी हुई चांदनी की झिलमिलाती वो रात ।
 याद है मुझे वो रात ।।

 चुमने  से सहमति थी वो ।
 बातों पर लर्जती थी वो ।।
 आंखों से शर्माती थी वो ।
 बिना कहे कह जाती थी वो ।।
 कैसे भूलूंं में प्यार की वो सौगात ।
 जो दी थी उसने पहली रात ।।
 याद है मुझ वो रात।।




वे वक़्त वो याद आते हैं ।
 हर पल वो याद आती हैं ।।
 कैसे जुदा करें खुद को उनसे ।
 वो सांसो में समा जाते हैं ।।





शाम की तन्हाइयों ने जीना सिखा दिया ।
 किसी के एतवार ने दर्द सेहना सिखा दिया ।।
 बडती रही मिलने की बेकरारी ।
 किसी के इंतजार ने पीना सिखा दिया ।।




भटकते हुए दिल को करार आ गया ।
 दुनिया को छोड़ कर मेरे पास आ गया ।।
 करते करते मौत का इंतजार ।
 जिंदगी पर मुझे ऐतबार आ गया ।।





आसमान के तारे जमीन पर आ जाएंगे ।
 या बहार के फूल खिल जाएंगे ।।
 कैसा होगा वह समा ।
 जब बांहों  में महबूबा आ जाएंगे ।।



  नरम नरम बाय हैं उनकी ।
कातिल अदाएं हैं उनकी ।।
 क्यों ना रहना चाहे कोई पहलू में उनके ।।
 नरम नरम बाहें हैं उनकी ।।




बादल  हवा का रुख मोड़ नहीं सकता ।
 शीशा कभी पत्थर को तोड़ नहीं सकता ।।
 यकीन है इतना उस पर ।
 वह वेखबर मेरे गम से वो हो नहीं सकता ।।








दिल से रे


सोलों की राह पर चलेगा कौन ।
 दुनिया को प्रेम के धागों से बांधेगा कौन ।।
 जब हम ही न रहेंगे तो ।
 हमारे जैसे मोहब्बत करेगा कौन ।।


जब से तुझ से रिश्ता हुआ ।
 मैं बड़ा बेइज्जत हुआ ।।
 तूने भी कोई कसर न छोड़ी ।
 अपनी निगाहों में रुसवा हुआ ।।


कोमल कोमल अंग तुम्हारे सुंदर यह दो नैन ।
 काली काली जुल्फे तुम्हारी दिन में कर दें रैन ।।
 गुलाबी होंठ तुम्हारे छलकते मधु के प्याले ।
 गोरे गोरे गाल तुम्हारे कर दें मुझे बेचैन ।।


जुल्फें है या काली घटाएं ।
 बिखर पड़े जब चले हवाएं ।।
 गोरे गोरे गालों पर तेरे ।
 बनकर नागिन सी लहराए ।।


दुनिया की बेवफाई ने वफा करना सिखा दिया ।
 मोहब्बत का जो कर्ज था मैंने वह भी चुका दिया ।।
 सारे जहां से वफा करते करते ।
 हमने खुद को भी मिटा दिया ।।


याद ना आए उसकी यही दुआ किया करता हूं ।
 रोज उसके प्यार में मर मर कर जिया करता हूं ।।
 भूलू कैसे उसकी बेवफाई को, चलाया था जो खंजर सीने पर मेरे ।
 आज भी उसी के लहू को धोया किया करता हूं ।।


आंखों में समा जलाए रखना ।
 वादों में वफा बनाए रखना ।।
 अगर न रख सको घर में मेरी तस्वीर ।
  मगर दिल में जरूर बरसाए रखना ।।


प्यार दुनिया की सौगात नहीं होती ।
 वह मिलते हैं मगर बात नहीं होती ।।
 कोई कैसे बताएं उन हरजाईयौं को ।
 प्यार में दिल तो टूटते हैं मगर आवाज नहीं होती ।।


सीने में उठे अरमानों को कैसे हम सम्भालें ।
 मदहोश हो जाते हैं सुनकर उनकी बातें ।
 गोरे गोरे मुखड़े की सुरमई आंखें ।
 ढा डालती हैं सितम जहां यह नजर डालें ।।


तुम्हारे ख्वाबों खयालों को हम चुरा लेंगे ।
 महकती हुई तेरी खुशबू को सांसो में समा लेंगे ।।
 लाख कोशिश कर ले जुदा करने की कोई ।
 आंखों में बसी तस्वीर तेरी तुम्हें दिल में छुपा लेंगे ।।


जब कोई दूर होकर भी दिल के पास होता है ।
 किसी से बार-बार मिलने को दिल तरसता है ।।
 बताया नहीं जाता जुबां से मोहब्बत का फसाना ।
 एहसास तो आंखों से बयां होता है ।।


हवाओं में खुलती खुश भी याद आती है ।
 फिजाओं में पायल की झनक सुनाई आती है ।।
 भुला देना चाहता हूं उसे मगर ।
 जब करता हूं बंद आंखें अपनी वो लड़की नजर आती है ।।


जैसे गिरता है पानी झरनों से ।
 जैसे गिरते हैं आंसू आंखों से ।।
 आजा कि तेरी याद में ।
 दिल तड़प रहा है बरसों से ।।


फूल देते हैं इकरार करने वाले ।
 खत लिखते हैं प्यार करने वाले ।।
 चाहते हैं एक बार देखना तुम्हें ।
 तुम्हारी एक मुस्कान पर मरने वाले ।।


इंतजार का एक-एक पल खास होता है ।
 कोई दूर होकर भी दिल के पास होता है ।।
 आंखें ढूंढती है जिसे रास्तों पर ।
 उसका न जाने कहां निवास होता है ।।


सूरज की पहली किरण सुबह का एहसास दिला देती है ।
 चांद की शीतल चांदनी घर की याद दिला देती है ।।
 अगर न हो जिंदगी में कोई हमसफ़र अपना ।
 तो यह जिंदगी तन्हा और वीरान बना देती है ।।


चलती है ट्रेन मंजिल पर पहुंचने के लिए ।
 चकोर जलता है आग में चांद को पाने के लिए ।।
 हम बिना आग के ही जलते हैं ।
 तुम्हारा प्यार पाने के लिए ।।


रास्तों पर चलने वालों का भी मुकाम होता है ।
 मिलती है निगाहें यही प्यार का पयाम होता है ।।
 मुंह से बयां नहीं किया जा सकता ।
 प्यार का तो केवल दिलों को एहसास होता है ।।


बेखबर मेरे दर्द से तू रह नहीं सकता ।
 ठुकरा कर मेरे दामन को तू जा नहीं सकता ।।
 भूल जाए बेशक मेरी वफाओं को ।
 अपनी बेवफाई को तू भूल नहीं सकता ।।


महकती हुई खुशबू को सांसो में समा लेते हैं ।
 वीरान गुलिस्तानों को बहार बना देते हैं ।।
 एहसास नहीं होता चाहने वालों को ।
 हम बड़े से बड़े गम को सीने में छुपा लेते हैं ।।


चलने से उसकी पायल चमकती है ।
 अंगड़ाई से उसकी चूड़ी खनकती है ।।
 जब देखती हैं कातिल निगाहें ।
 रब की सौं मेरी तो जान निकल जाती है ।।


धड़कते हुए दिल को खुमारि आ गई ।
 जाने कहां से प्यार की बीमारी आ गई ।।
 जब से आप आए जिंदगी में मेरी ।
 मुझको शेर ओ शायरी आ गई ।।


दिल कुछ कहना चाहता है लव कह नहीं सकते ।
 मुंह पर तुम्हारी तारीफ हम कर नहीं सकते ।।
 क्योंकि बात रखने वाले अपने लोग ।
 दुनिया में हर किसी को मिल नहीं सकते ।।


जुल्फें उड़ती है फिजाओं के चलने से ।
 होती है मोहब्बत निगाहों के मिलने से ।
 बंद आंखों को भी नजर आती है ।
 तस्वीर  प्यार की इश्क की पहचान मिलने से ।।


चांद से जैसे चांदनी बिखर आती है ।
 हाथों में जैसे मेहंदी निखर आती है ।।
 जब भी देखता हूं तुम्हारी आंखें ।
 तेरी तस्वीर नजर आती है ।।


दिल में कोई अरमान जगाता है ।
 प्यार का कोई एहसास कराता है ।।
 अक्सर भूल जाते हैं उसी को ।
 जो हमें प्यार करना सिखाता है ।।


दिल तन्हा उदास होता है ।
 आंखों में नशा बसा होता है ।।
 दिल जिसे याद करता है ।
 तन्हाइयों में भी उसकी मौजूदगी का एहसास होता है ।।


बहार आए बाग में तो फूल खिल जाते हैं ।
 दिल से निकले अरमान मोहब्बत बन जाते  हैं ।।
 अहसास ही कहा होता है दीवानों को ।
 प्यार के फूल तो खिलते खिलते ही खिल जाते हैं ।।



शायरी दिल से


हम जानते हैं तुम हमें न पसंद करोगे ।
 किसी और के ही नाम पर घमंड करोगे ।।
 जब रह जाओगे अकेले दुनिया में ।
 तब संग मेरे रहने की फरियाद करोगे ।।

चांद ने चांदनी न होती ।
 राग में रागनी न होती ।।
 मोहब्बत करता है कौन ।
 अगर दिल में जवानी न होती ।।

पतझड़ के मौसम में जो साख झडती है ।
 जेठ के महीने में राह तपती है ।।
 जिक्र भी गवारा न था जिसका ।
 किसी के लिए मुलाकात भी करनी पड़ती है ।।


बिना सांस की जिंदगी नहीं होती ।
 बिना चांद के चांदनी नहीं होती ।।
 बिना अपनों के इस जीवन में ।
 कोई खुशी, खुशी नहीं होती ।।

कठिन रास्तों में भी चलता जाता हूं ।
 मन है मायूस फिर भी मुस्कुराता हूं ।।
 देख कर तेरे चेहरे की खुशी ।
 मैं अपने गम भूल जाता हूं ।।


फूलों के साथ बाग में कांटे भी लगे होते हैं ।
 खुशी के साथ जीवन में गम भी लगे होते हैं ।।
 देखकर मेरी सीरत मायूस न हो न तुम ।
 गम तो अपने साथ साए की तरह लगे होते हैं ।।


सोचा था साथ रहना जमाना छोड़ा दिया ।
 घायल था जिगर नमक भी लगा दिया ।।
 सोया था कब्र में उसकी याद के सहारे ।
 कब्र पर मेरी आकर किस ने जगा दिया ।।


सुहाने मौसम में जुदाई खलती है ।
 यार को देखने को आंख तरसती है ।।
 क्या करें इस तड़पते दिल का ।
 हर तरफ उसकी सूरत दिखती है ।।


फूल है गुलाब का यूं न मत तोडो तुम ।
 कांटा कहीं लग न जाए यूं न पकड़ो तुम ।।
 पंखड़ी पंखडी फरियाद करती है ।
 प्यार को बदनामी का काम न समझो तुम ।।


किनारे बैठकर सागर की गहराई का पता नहीं लगाया जा सकता ।
 हम करते हैं प्यार जितना प्रतिशत से बयां नहीं किया जा सकता ।।
 यकीन न हो तो चीर कर देख लो दिल हमारा ।
 बिना तुम्हारे नाम का कतरा लहू में नहीं बह सकता ।।


प्यार दिल की शान होती है ।
 आंख इश्क का पयाम होती है ।।
 क्योंकि दिल को दुनिया में ।
 मोहब्बत की पहचान होती है ।।


किसी की मोहब्बत को चुराया नहीं जाता ।
 किसी के प्यार को दबाया नहीं जाता ।।
 मांगे प्यासा पानी पीने को तो ।
शराब का जाम उसे पिलाया नहीं जाता ।।


सीने में है वफा का पानी ।
 अदा है अपनी बड़ी बेगानी ।।
 पागल ही होते हैं अपनों पर मरने वाले ।
 अपनों ने अपनी कदर ही कहां जानी ।।


देख के हसीन चेहरा मचल जाता है दिल ।
 जब याद आती है उसकी संभल जाता है दिल ।।
 कब तक बचाऊं इस दिल को  । 
यूं ही अजनबी रास्तों में भटक जाता है दिल ।।



 मालूम नहीं है तुमको अपनी खुदाई का ।
 दिल घबरा जाता है देखकर हरजाई का ।।
 नाचने कूदने की आदत नहीं अपनी ।
 हमने हर घूंट पिया है सब्र से तनहाई का ।।



मोहब्बत ने जिंदगी से एक बार यूं कहा । 
न होती दुनिया में मोहब्बत बोल तू करती रे क्या ।।
 खामोश रही न कुछ कहा जिंदगी ने  । 
बस आंख से केवल आंसू बहा ।।







शनिवार, 4 जनवरी 2020

फौजी की शायरी

कश्मीर में सर्दी न होती ।
राजस्थान में गर्मी न होती है ।।
 आ जाता मैं तुरंत तुम्हारे पास ।
 बदन पर अगर फौजी भर्ती न होती ।।

फौजी की जिंदगी भी अजीब होती है ।
 गमों में डूब कर भी तकलीफ कहां होती है ।।
 दिखा भी दे चीर कर दिल अपना मगर ।
 लोगों में देखने की हिम्मत ही कहां होती है ।।



शेर ओ शायरी

शेर ओ शायरी दिल से

(1)
वेवस जिगर में नासूर पड़ गए होते ।
 खूनी खंजरों से सैकड़ों टुकड़े सीने के हो गए होते ।।
 गजल के रास्ते गम बहा दिए वरना ।
 गमों में डूब के हम लोग मर गए होते ।।

(2)
मेरे एहसासों की ग़ज़ल हो तुम ।
 मेरे अरमानों की पहल हो तुम ।।
 रब से मांगा है टूटकर जिसे ।
 वही दीवाने की फरियाद हो तुम ।।

(3)
लफ्जों में समा जाओ sms की तरह ।
 दिल में बस जाओ रिंगटोन की तरह ।।
 कभी भी खत्म ना हो ।
 अपना प्यार बैलेंस की तरह ।।

(4)
मचलती हुई शम्मा को सराय में छोड़ दिया ।
 झलकते हुए जामों को मैंखाने में छोड़ दिया ।।
 जब से आप आए जिंदगी में मेरी ।
 मैंने अपने लिए जीना ही छोड़ दिया ।।

(5)
 जज्बातों को कब्र में दफन किया जाता है।
विश्वास का जमाना खून कर जाता है ।।
 बहुत मुश्किल है जीना दुनिया में ।
 हर कोई अपने अरमानों की अश्ती जला जाता है ।।

(6)
जिस पर किया था एतबार वही बेवफा निकला ।
 खंजर चला जिगर पर पर खून न निकला ।।
 धड़कता था दिल जिसके लिए ।
 वही मेरा कातिल निकला ।।

(7)
तेरे ख्वाबों में रहना चाहता था तेरे पास भी न रह सका ।
 अपनी जुदाई भी इस तरह हुइ अलविदा भी न कह सका ।।

(8)
मिलते हैं मगर मुलाकात नहीं होती ।
 कहते हैं मगर बात नहीं होती ।।
 जिंदगी भर साथ निभाने वाले ।
 यूं दूर रहकर जिंदगी आवाद नहीं होती ।।

(9)
शमा को भूल जाए तो परवाने याद आएंगे ।
 खुशी को भूल जाएंगे तो गम याद आएंगे ।।
 लाख कोशिश करेंगे भूलने का मगर ।
 जब दुखायेगा दिल आपका कोई तब हम याद आएंगे ।।

(10)
जाने क्यों लोग मोहब्बत पर गुमान करते हैं ।
 दिल में तुम्हारे लालच है प्यार को बदनाम करते हैं ।।
 मिट जाएगी चाहत जमाने से ।
 क्यों कुदरत के इस तोहफे को शर्मसार करते हैं ।।


कवि की कल्पना

एहसास दिलों का जो लिखा हमने ।
अपना  सा लगेगा जो पढ़ा तुमने ।।


।। कल्पना।।

(1)
दहकते हुए सूरज की गर्मी हो तुम ।
पूनम के चांद की नरमी हो तुम ।।
मेरी  तन्हाईयों में बसने वाली।
 सितारों की झिलमिल से बनी हो तुम।।

(2)
तुझे देखूं तो दिल मचलता है मेरा।
 सांसो की गर्मियों से दिल पिघलता है मेरा ।।
नशे में झूमती आंखों की कसम ।
दबाया है सीने में फिर भी दिल धड़कता है मेरा।।

(3)
हर शाम मेरे पास आती हो तुम ।
खामोश मेरी तन्हाई को मिटाती हो तुम।
 एहसास है मुझे तेरी मौजूदगी का।
  फिजाओं में खुशबू बन आई हो तुम ।।

(4)
सांसों के रास्ते दिल में समा जाती हो तुम।
 आंखें जो बंद कर लूं सामने आ जाती हो तुम।।
 मेरी जिंदगी का सपना हो या हकीकत ।
 आंखों को खोलते ही ओझल हो जाती हो तुम।।

(5)
रोज सपनों में आ जाती हो तुम ।
 दर्द दिल का बड़ा जाती हो तुम ।।
 मेरे सपनों की दुनिया है तुम्हारे लिए ।
 हकीकत की रोशनी में कहीं खो जाती हो तुम।।

(6)
महसूस किया है खामोशी मैं तुम्हें ।
 शाम की शीतलता रात की गहराई में तुम्हें ।।
 हर पल मेरी जिंदगी का एक राज हो तुम ।
 मिलता हूं और शाम फिर भी खास हो तुम ।।
 हर वक्त रहती हो मेरे पास ।
 मेरी दोस्ती मेरे हमराज हो तुम।।

(7)
मैंने तुम्हें ढूंढा है सांसों की गहराइयों में,
 रूह में मेरी समाई हो तुम।
 तुम्हें ख्वाब कहूं या जिंदगी मेरी , 

कोई और नहीं मेरी "तन्हाई" हो तुम।।





प्राकृतिक को दर्शाती यह कविता बहुत ही मनोहर


गरर गरर नदी के धारा, चले पवन की चाल ।
घनन घनन गरजे बदरवा, बिजली गिरी पाताल ।।
पर्वत ऊपरे बहें धाराएं, लुढ़क रहे पाषाण ।
 वृक्ष धरा को चूमते, तोडें अपना मान ।।
 पवन देव के रोस से, टूटे वृक्ष तमाम ।
 जो प्रकृति के बीच में, छिड गयो संग्राम ।।
 बहे चले वृक्ष बड़े, बीच नदी की धार ।
 मांझी नदी के पाट पर, बैठे लिये पतवार ।।
 नदी सरासर बह रही, करके चोंडो पाठ।
 जों उमड पढ़ो, सागर कोई विराट ।।
 झर झर झर झर आसमान से, मेघ करें बौछार ।
 वृक्ष लताएं टूटती, जब पड़े जल की मार ।।
 सिलाओं में चली दरारें, पलट पलट कई बार ।
 आसमानी नीर ने, करी धरा भरमार।।




!!पहली बारिश का प्राकृतिक अवलोकन!!


धनन धनन मेघा गरजे ,आनंद होत अति।
 चातक खग पशु प्यास बुझाऐं, हरि होत धरती ।।
जलाशयों में भंवर पड़े, मेघ डोलत हैं अति ।
 मंद मंद वायु बहती, पक्षी गुंजन करें अति ।।
 शीतल पवन चल रही, पानी रही बहाए ।
 तरुवर पत्ते झूम रहे, सरगम रहे बनाएं ।।
 सज रहे फल फूलबाडी, खिल रहे सब फूल ।
 भवरे गुंजन कर रहे ,भेदें प्रेम का शूल ।।
 देख प्रकृति भेष को , मेरा मन बोराए ।
 जो कोडी भेष को, कामदेव मिल जाए ।।
 मैदानों में घास हरी , ओश बुंद रही मंडराया ।  
प्रातकाल रवि किरण पड़े, मोती सी बन जाए ।।
 नव में खग उड़ रहे, फटो मेघ हो जाए ।
 ऐसी रैली चल रही, जो तरुवर पत्ते उड़ाए ।।



!! रात की कविता !!



लाल किरणें ढल रही, बादल नहीं छुपाए ।
 तारे अंवर में खिले, चांदनी रहे बढ़ाएं ।।
 प्रकाश धीरे बुझ रहा , रात्रि गोद फैलाए ।
 थक कर चूर हुए जन को , सुकून रहीं पहुंचाए ।।
 निशा बड़ी सुखदाईनी , शीतलता बरसाए ।
 जीवो को ले गोद में , प्रेम से रही सुलाए।।
 लोरियां बच्चे सुने , थपकी  माता लगाए ।
 निंदिया आंखों में बसे , रात्रि उन्हें सुलाए ।।
 तारे झिलमिल कर रहे , चांद रहा लुभाय ।
 प्रेम में पागल हुआ चकोर , पावक विच समाय ।।
 वातावरण तो शांत है , मेंढक रहे ठरराय ।
 ठंडी ठंडी पवन चले , शितल तन हो जाए ।।
 साधु-संत साधना करते , योग रहे बढ़ाए ।
 रात्रि मैया कृपा करे , दूगना फल मिल जाए ।।
 रात्रि पंख पसार के , अंधकार रही बड़ाय ।
 समय जगा निशाचरों का , मेरो मन घबराए ।।
 रात्रि मुझसे कह रही , तू क्यों रहा भय खाय ।
 सुख सपनों को देख तू , रक्षा करेगी माय ।।



!! दर्द दिवाने का !!

 अजनबी शहर में अजनबी रास्ते, मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे । 
मैं बहुत देर यूं ही चलता रहा , तुम बहुत देर तक याद आते रहे ।।
 जहर मिलता रहा जहर पीते रहे ।
 रोज जीते रहे, रोज मरते रहे ।।
 जिंदगी भी हमें आजमाती रही ।
 और हम भी आजमाते रहे ।।
 जख्म जब भी कोई दिल पर लगा ।
 जिंदगी की तरफ एक बगीचा खिला ।।
 हमारे जख्मों पर वो नमक लगाते रहे ।
 चोट लगती रही चोट लगती रही , और हम गुनगुनाते रहे ।।
 मुस्कुराते रहे ।। 
सोचा  था तेरे शहर में साथ रहने को , तेरे शहर में भी न रह सका ।
 अपनी जुदाई भी इतनी अजीब थी , अलविदा भी न कह सका ।।


!!  आज की दुनिया का सच !!

कलेजा जाए बैठा मेरा , कहीं नहीं जाए यह बात ।
ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।
गऊ सालों में हुए घुटाले , कही हुई हड़ताल ।
 कहीं किसी का घर है उजड़ा , पड़ी पेट पर लात ।।
 शक्तिशाली धन्यवाद और , गरीब हुए लाचार ।
 ऐसी है अब यहां की  रिति , ऐसे हुए यहां हालात ।।
 ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।

 साधु-संतों को कोई न पूजे,  घर देवों में पढ़ती लात ।
 घर की लक्ष्मी चौराहे पर , बाला नाच करे दिन-रात ।।
 ऐसे है समाज की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।
 ऐसी हो गई देश की हालत,  ऐसे हुए यहां हालात ।।

 प्यासे को कोई पानी न दे , रोते को कोई न दे प्यार ।
 साधुऔ को भोजन न मिलते , दान करे न कोई यार ।।
 रक्षक ही भक्षक बन बैठे , कौन सुने मेरी फरियाद ।
 ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।

 भाई भाई को मारेपीटे , प्रेम की रही नहीं कहीं आस ।
नमक रगड़ते है जख्मों पर , दवा नहीं किसी के पास ।।
 जिसकी लाठी उसकी भैंस , ऐसे हुए यहां हालात ।
 ऐसे हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।। 

झूठ ही लेना झूठ ही देना , मारा गया स्वाभीमान ।
गरीबों की कोई न सुनता , राज करे यहां धनवान ।।
 घर घर में भेदी है जन्मे , कैसे बचे अब घर की लाज । ऐसी हो गई रेस की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।


 बेटी का जब शादी आई , पड़ी बाप पर दहेज की मार । 

जाने कितने हुए बर्वाद , बेटी वाले यह परिवार ।।
आगों में जलती बहुओं की , अब कौन सुने फरियाद ।
 ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।


 पाकिस्तान देश पड़ोसी, हमको दिखा रहा है आंख ।

 पास नहीं खाने को रोटी , उड़ा रहा बारूदी राख ।।
 धोखे कर कर मारे सैनिक,  उखाड़ दिए पुराने घाव ।
 संसद में बैठे है नपुंसक, कौन सुने मेरी फरियाद ।
 ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।

 है कोई जो सुन ले भैया , रविंद फौजी की फरियाद ।

ऐसी हो गई देश की हालत , ऐसे हुए यहां हालात ।।



!! राखि एक बंधन !!

कच्चे धागों की एक डोर , अटूट कसम बंधवाय  । 
भाई बहन की करें रक्षा , यही हमें बताय ।।
 सात समंदर दूर हो भाई , तो भी खींच के लाय ।
 रक्षाबंधन पर भाई बहन को , दे मिल वाय ।।
 लड़ते झगड़ते बचपन बीता , प्यार दिनोंदिन गहराय । 
एक दिन आए जीवन में , वक्त इन्हें बिछुडाय ।। 
एक रिश्ते में छिपे हुए,  कई रिश्ते हैं मिल वाय ।
 बड़ी बहन माता रूप में , भाई पिता बन जाय ।।
 डोली में जब बैठी बहना , अक्ष नीर बहाए ।
 बचपन की सारी यादों की , एक झलक दिखाएं ।।
 दुनिया के सारे रिश्ते में , पवित्र यह लागे मोय ।

 साल भर में एक बार ही , रक्षाबंधन होय ।।

 भाई बहन के प्यार की , याद हमें दिलवाए ।
 बरसों के बाद भी , भाई-बहन को मिलाएं ।।
 देखकर सावन पर्व महान , मेरो मन इठलाय ।
 धन्य कहूं रक्षाबंधन को , भाई बहन को मिलाय ।।